शीर्षक- कुछ कह रही उसकी आंखें.

एक कशिश है उसकी समंदर सी खूबसूरत आंखों में,

उसमें डूब जाने को दिल चाहता है।

उसे दिल में बसा कर आंखों में खो जाने को दिल चाहता है।

कुछ कह रही है उसकी आंखें।

वो कहती हैं मैं खुश हूं,

पता नहीं क्यों उसकी खूबसूरत आंखों में,

मुझे दर्द दिखता है।

ऐसा लगता है दर्द को दिल में समेट कर,

होठों पर मुस्कान लिए गमों को छिपा रही है।

कुछ कह रही उसकी आंखें ।

वो कहती हैं मैं मतलबी हूं,

लेकिन उसकी साफ दिल की दास्तां

उसकी खूबसूरत आंखें बया कर रही है।

कुछ कह रही है उसकी आंखें।

आंखों में शपनो की झलक,

उड़ने की चाहत तो दिखती है।

लेकिन ऐसा लगता अपनी ख्वाहिशों को दिल दबा कर रखना चाहती।

कुछ कह रही है उसकी आंखें।

उसकी शादगी आंखों के बीच लगी

छोटी सी लाल बिंदी बया कर रही है।

जुबा से भले कुछ ना बोले

आंखें बहुत कुछ बोल रही है।

कुछ कह रही है उसकी आंखें…..

Write by – A.K

जो भी हो मगर अच्छा लगता था..

प्यार था या कोई सपना..🤔

मगर जो भी हो अच्छा लगता था.🙂

उनसे मिलकर खुद को जाना..

खुद से ज्यादा उसे चाहना..

जो भी हो मगर अच्छा लगता था.🙂

याद है मुझको वो पहली बार का मिलना..

मुस्कुरा कर पलके झुका कर उसका शर्माना.🙈

जो भी हो मगर अच्छा लगता था.🙂

दूर होकर कर भी..

हर पल उसको अपने पास महसूस करना चाहना.

जो भी हो मगर अच्छा लगता था..🙂

बात- बात पर एक दूसरे का मजाक बनना.😋

मुसीबत में साये के तरह साथ खड़ा रहना..🤝

जो भी हो मगर अच्छा लगता था.🙂

छोटी-छोटी बातो पर उसका गुस्सा करना.😞

बड़ी बडी आंखें दिखाना चेहरे का लाल हो जाना. 😡

वो रूठना मनाना मुंह बनना..😏

जो भी हो मगर अच्छा लगता था.🙂

मेरे नाराज़ या गुस्सा होने पर..

नादानी करना हंसाने की कोशिश करना.🙂

बडा सुकुन देता था..😊

जो भी हो मगर अच्छा लगता था..🙂

उनसे ही दिन की शुरुआत और रात अंत होता था..

उसका इंतेज़ार तो पलके भी किया करती थी..

जबतक आवाज ना सुन ले नींद कहां आती थी.😴

जो भी हो मगल अच्छा लगता था..🙂

हर बात का हिसाब लेना..

कहां थे क्या कर रहे थे फोन क्यों रिसिवर नहीं किये.

खाने खाये की नही खाये उफ़..🤦

कभी कभी बहुत चिढ़ भी जाते थे..

मगर जो भी हो अच्छा लगता था.☺️

दुनिया की हकीकत और..

धर्म की दीवार खड़ी थी.😔

पता था एक दिन जुदा होना है.😟

मगर जो भी हो अच्छा लगता था उसे चाहना.

भले उसे पा ना सकेंगे हम जानते थे.😢

फिर भी अंधों की तरह उससे प्यार करना.🥰

उसमें खो जाना..

जो भी हो मगर अच्छा लगता था.☺️

यह मेरी पहली रचना है।🙏

❤️ अंकित मेहता