शीर्षक- कुछ कह रही उसकी आंखें.

एक कशिश है उसकी समंदर सी खूबसूरत आंखों में,

उसमें डूब जाने को दिल चाहता है।

उसे दिल में बसा कर आंखों में खो जाने को दिल चाहता है।

कुछ कह रही है उसकी आंखें।

वो कहती हैं मैं खुश हूं,

पता नहीं क्यों उसकी खूबसूरत आंखों में,

मुझे दर्द दिखता है।

ऐसा लगता है दर्द को दिल में समेट कर,

होठों पर मुस्कान लिए गमों को छिपा रही है।

कुछ कह रही उसकी आंखें ।

वो कहती हैं मैं मतलबी हूं,

लेकिन उसकी साफ दिल की दास्तां

उसकी खूबसूरत आंखें बया कर रही है।

कुछ कह रही है उसकी आंखें।

आंखों में शपनो की झलक,

उड़ने की चाहत तो दिखती है।

लेकिन ऐसा लगता अपनी ख्वाहिशों को दिल दबा कर रखना चाहती।

कुछ कह रही है उसकी आंखें।

उसकी शादगी आंखों के बीच लगी

छोटी सी लाल बिंदी बया कर रही है।

जुबा से भले कुछ ना बोले

आंखें बहुत कुछ बोल रही है।

कुछ कह रही है उसकी आंखें…..

Write by – A.K

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